
यादों की बारात हो, चाय का भी साथ हो
मखमली हरियाली पर बूंदों की हल्की बरसात हो ।
नीला आसमान हो, महके हुए जज़्बात हो
इस नन्ही सी सुबह में एक उम्रभर की बात हो ।।
ये सफर भी कमाल रहा ए दोस्त
अब एक नये दौर की शुरुवात हो ।
जो बीत गया एक सपना था
नयी हकीकतों से अब फिर नयी मुलाकात हो ।।
कभी था एक गुलिस्तॉं किसी का
जो लुट गया बहारों के मौसम में ।
के बरसाता रहा बागवॉं शबनम
किसी रकीब के आँगन में ।।
अक्सर घर जला के औरों का,
करें अपने दिलों में उजाला ।
ये फितरत है रकीबों की,
कैसे कोई हो निराला ।।
पर कब ठहरा है वक्त एक ही मकाम पे
नित बदलते रहे हैं जमाने ।
और सुलझती रहीं हैं उलझने हमेशा
तकदीर ने लिखे हैं नये अफसाने ।।
एक और सवेरा होने को है “अभी”
इस दिन की कभी ना रात हो ।
यादों की बारात हो, चाय का भी साथ हो
इस नन्ही सी सुबह में एक उम्रभर की बात हो ।।
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