
फिर किसी ने छेडे वो यादों के तार
और शाम का साया मलाल हो गया ॥
ये असर था उन के प्यार का
सफर तन्हाई में भी कमाल हो गया ॥१॥
दिल को टटोला जो घबरा के मैंने
बस एक ऑंसू था जो सागर विशाल हो गया ॥
वो दुश्मन पे लुटा बैठे दौलत अपनी
लो दर्द की जागीर से मैं मालामाल हो गया ॥२॥
मंजिल तो बडी दूर की सोची थी लेकिन
रास्ते पर आधे एक बवाल हो गया ॥
वो नया जहॉं जो बसाना था हम को
ख्वाब से जागे तो देखा बस एक खयाल हो गया ॥३॥
किस्सा-ए-उल्फत उन्होंने इस खूबी से किया बयॉं
मेरा दास्तान-ए-दर्द भी एक सवाल हो गया ॥
कतरा कतरा बहता रहा जो मेरे दिल से
सुना है के वो लहू भी अब हलाल हो गया ॥४॥
अभिमन्यू था मैं, पहुँचा चक्रव्यूह के बीच मगर
अश्वत्थामा सा अब मेरा ये हाल हो गया ॥
कुछ और इस दुनिया से मिले ना मिले `अभी`
तजुर्बा-ए-जिंदगी तो बेमिसाल हो गया ॥५॥
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