Another attempt to write a Gazal – hope you like it. बेफिक्र मुसाफ़िर को, मंजिल की जरूरत क्या है ?रास्तों पर जो पाते हैं सुकून उन्हें, किसी मुक़ाम की जरूरत क्या है ? कैद में बेचैन रही मेरी रूह, जमाने के रिवाजों की दीवारें हैं बुलंदअनजान महफिलों में बेवजह, हर दम मुस्कुराने की जरूरत क्या…
Experimented a little further with छन्द (Meter) this time – here’s my first poem in अनुष्टुप छन्द ! Hope you like it. भेट माझी तुझी होता । झाली सांज मनोहर ।हात हातांत घेऊन । भासे जीवन सुंदर ॥संपे विरह जन्मांचा । फुटे मनांत अंकुर ।भेट माझी तुझी होता । झाली सांज मनोहर ॥ १ ॥…
हैरान इन निगाहों ने नजारों से ये पूछा ।रातों में चमकते हुए सितारों से ये पूछा ॥ १ ॥ सदियों से गुजरें हैं दिलों के कारवां यहाँ ।कैसे उमड़ा ये तूफान बहारों से ये पूछा ॥ २ ॥ था इक इंसान जिसे मिटानी थी ये दुनिया ।हो कर मजबूर उस रक़ीब से ये पूछा ॥…
फिर किसी ने छेडे वो यादों के तारऔर शाम का साया मलाल हो गया ॥ये असर था उन के प्यार कासफर तन्हाई में भी कमाल हो गया ॥१॥ दिल को टटोला जो घबरा के मैंनेबस एक ऑंसू था जो सागर विशाल हो गया ॥वो दुश्मन पे लुटा बैठे दौलत अपनीलो दर्द की जागीर से मैं…
यादों की बारात हो, चाय का भी साथ होमखमली हरियाली पर बूंदों की हल्की बरसात हो ।नीला आसमान हो, महके हुए जज़्बात होइस नन्ही सी सुबह में एक उम्रभर की बात हो ।। ये सफर भी कमाल रहा ए दोस्तअब एक नये दौर की शुरुवात हो ।जो बीत गया एक सपना थानयी हकीकतों से अब…